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गालियां या सामाजिक गंदगी

 समाज में जब तक लोगों की जुबान पर मां-बहन की गालियां चलती रहेंगी, तब तक औरतों ़ के हालात नहीं सुधरेंगे। दहेज प्रताड़ना, भेदभाव या रेपकांड जैसी सारी समस्याओं की जड़ ये गालियां ही तो है जो ना सिर्फ औरत को जलील करती है बल्कि उनके लिए खतरा भी पैदा करती है। जहाँ देखो वहाँ घर, बाज़ार, दुकान या कभी-कभी मंदिर के आसपास भी लोग ऐसी गालियों से परहेज़ नहीं करते। उन्हें आदत होती है बात-बात पर मां-बहन करने की और इसी में वे अपनी शान समझते हैं। आम आदमी ही नहीं, बडे-बडे नामी लोग भी मां-बहन की गालियों वाली बीमारी से अछूते नही हैं। इन गालियों का देश के बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है और कहीं न कहीं ये उनके संस्कारों में शामिल होता जाता है। मैंने कितनों को देखा है जब कोई बच्चा खासकर लड़का अगर अपने पिता और चाचा से कैच की गालियां देता है तो उनके बड़े कभी-कभी औरतें भी उसे रोकने के बजाय हंसते हैं जिससे गालियों को बढ़ावा मिल जाता है और फिर घर से शुरू हुई गालियां पूरे समाज में फैल जाती है उसी एक बच्चे के द्वारा। जब दो मर्दों की लड़ाई हो तब भी वह एक दूसरे को ऐसी गालियां देते हैं और जब कोई मर्द किसी औरत खासकर...
हाल की पोस्ट

साल 2020

2019 में जो लोग सुकून से जी रहे थे साल 2020 में उन सबके बीच अफरा तफरी मच गई। साल के शुरुआत में ही कोरोना अपना असर दिखा रहा था। दो-तीन महीने बीतते बीतते लोगों के दिलों दिमागों पर इसका डर बुरी तरह से घर कर गया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने तब कई बार लॉकडाउन भी कराए। घरों से बाहर ना निकलना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुंह पर मुखौटा लगाना आदि अनिवार्य कर दिया गया। मैंने न्यूज में सुना था टीवी पर के अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया है, "काश इस 2020 को अनइंस्टॉल करके रीइंस्टॉल करने का कोई तरीका हॉटा, इस साल में कोरोनावायरस है।    जब देश के बाहर पूरी दुनिया में कोरोना का कहर चल रहा था और फिर देखते ही देखते भारत में भी हाल बुरा होने लगा तो अचानक हुऐ लॉकडाउन के कारण लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि मोदी जी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में लोग अपनी इच्छा के अनुसार दान कर सकते हैं। कुछ अभिनेताओं, खिलाड़ियों, बड़े व्यापारियों और कई उद्योगपतियों ने दान किये। बावजूद इसके जगह जगह त्राहि-त्राहि मची थी। हद तो तब हो गई जब पूरे भारत में लौकडाउन था और सड़को...

मां-बाप का डर

 कहते हैं कि जहां विश्वास है वही प्यार है। फिर यह बात आजकल के पेरेंट्स और बच्चों पर क्यों लागू नहीं होती ? क्या दुनिया में पैरंट से बढ़कर बच्चों को कोई और प्यार कर सकता है। आजकल की टेक्निकल नॉलेज बच्चों में उनके पेरेंट्स से ज्यादा बढ़ गई है, ऐसे में बच्चों को यह लगता है कि वह सब जानते हैं और समझते हैं। जबकि, इंसान चाहे कितनी भी डिग्री, एजुकेशन और टेक्निकल नॉलेज हासिल कर ले, जो बातें एक्सपीरियंस से समझ आती है वह किसी और से कहां। और एक्सपीरियंस तो माता पिता से बेहतर शायद ही कोई दे पाए। अब बात ये है कि बच्चे अपने पैरंट्स पे भरोसा क्यों नहीं करते या ये कहें कि पैरंट्स को अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए। जैसा कि हम जानते हैं, हम वही पाते हैं जो देते हैं, प्यार से प्यार, विश्वास से विश्वास और इज्जत के बदले इज्ज़त। गैरों से तो इन भावनाओं की उम्मीद नहीं कर सकते, कम से कम अपनों से तो की जा सकती है और बात अगर बच्चों और पेरेंट्स की हो तो डेफिनेटली।          अनुभव हमें जीना सिखाते हैं और प्यार एक दूसरे को समझना। पर उस प्यार की बुनियाद हिलती रहती है जिस पर भरोसे की नी...

तनाव मुक्त रहें

    आजकल की पीढ़ियों में patience की कितनी कमी है ये  आए दिन देखे जाते रहे हैं। लोग सफलता की चाह में सीखना भूल जाते हैं और जीतने के लिए जिद और जुनून में फर्क नहीं कर पाते हैं। नतीजा, असफलता के डर से आत्महत्या तक कर डालते हैं।      आमतौर पर आज की पीढ़ियों में दोस्तों की या यूं कहें के अच्छे दोस्तों की कमी की वजह से ऐसा होता है ये कहना गलत नहीं होगा। अब सवाल आता है के हम अच्छे दोस्त लाए कहां से? अच्छे दोस्त हमारे अपने perent बन सकते हैं या हमारे भाई बहन, जिनसे हम अपने मन की सारी बाते share कर सके।       Friendship is the best quality in any relationship.       अगर हर रिश्ते में दोस्ती हो जाए या ज्यादातर तो यकीन माने डिप्रेशन जैसी स्थिति कभी भी नहीं आयेगी। पर ऐसा होता ही नहीं है क्योंकि हर एक की मनोदशा है अपनी इच्छा दूसरे पर थोपना और यहीं से शुरुआत होती है बाहर दोस्त ढूंढने की। जो़ बिल्कुल अपने जैसा सोचता हो या support करता हो।       इसीलिए कहते हैं के दोस्त बनिए और दोस्त बनाइए अपनों को, दोस्ती कीजिए अपनों से। किसी ...