2019 में जो लोग सुकून से जी रहे थे साल 2020 में उन सबके बीच अफरा तफरी मच गई। साल के शुरुआत में ही कोरोना अपना असर दिखा रहा था। दो-तीन महीने बीतते बीतते लोगों के दिलों दिमागों पर इसका डर बुरी तरह से घर कर गया। प्रधानमंत्री मोदी जी ने तब कई बार लॉकडाउन भी कराए। घरों से बाहर ना निकलना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुंह पर मुखौटा लगाना आदि अनिवार्य कर दिया गया। मैंने न्यूज में सुना था टीवी पर के अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया है, "काश इस 2020 को अनइंस्टॉल करके रीइंस्टॉल करने का कोई तरीका हॉटा, इस साल में कोरोनावायरस है।
जब देश के बाहर पूरी दुनिया में कोरोना का कहर चल रहा था और फिर देखते ही देखते भारत में भी हाल बुरा होने लगा तो अचानक हुऐ लॉकडाउन के कारण लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई थीं। हालांकि मोदी जी ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में लोग अपनी इच्छा के अनुसार दान कर सकते हैं। कुछ अभिनेताओं, खिलाड़ियों, बड़े व्यापारियों और कई उद्योगपतियों ने दान किये। बावजूद इसके जगह जगह त्राहि-त्राहि मची थी। हद तो तब हो गई जब पूरे भारत में लौकडाउन था और सड़कों पर दिहाड़ी मजदूर व छात्रों की जगह -2 शहर दर शहर बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। कारण कि लॉकडाउन की वजह से उनके रहने खाने का ठिकाना ना रहा।अपने-अपने राज्यों में कई मुख्य मंत्रियों ने ऐसे लोगों के लिए रहने खाने का प्रबंध कराया लेकिन फिरभी कहीं-कहीं राजनीतिक खेल चलने लगे और दंगे भी होने लगे। अभिनेता सोनू सूद मसीहा बनकर उन मजदूरों और छात्रों के लिए आगे आए और ना सिर्फ उन्हें अपने घर तक पहुंचाया, बल्कि उनके घर पहुंचने के बाद भी मदद की। सेल्यूट थिस मैन। इसके लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रतिष्ठित एसडीजी विशेष ह्यूमन टेरियन एक्शन अवार्ड से सम्मानित भी किया गया। इस वास्तविक हीरो के लिए दिल से सलाम। इसी दौरान सुशांत सिंह राजपूत की मौत हो गई थी।
अफवाह फैलाई गई कि सुशांत ने खुदकुशी कर ली। लेकिन उनके फैन को यह बात हजम नहीं हो रही थी। सबको यही लग रहा था कि उनके पास सुसाइड की कोई वजह नहीं थी फिर कैसे? सो सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से वायरल होने लगी कि सुशांत की हत्या हुई है इसकी जांच होनी चाहिए। वायरल खबर रंग लाई। सुशांत सिंह की मौत के करीब 2 महीने बाद रिपब्लिक इंडिया न्यूज़ चैनल ने अर्णब गोस्वामी और उनकी टीम के साथ इस केस में अहम भूमिका निभाई। तो वही कंगना रनौत भी कहां पीछे रहतीं। वह तो हमेशा से ही कुछ ऐसा कहतीं जिस पर कभी किसी ने सीरियसली सोचा ही नहीं।
मुंबई पुलिस ने इस मामले में शुरुआत से ही निंदनीय कार्य किया। बिना जांचे परखे सुसाइड करार दे दिया।
सुशांत के कातिलों को बचाने की पूरी कोशिश करती रही है। पहले तो किसी को समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर मामला क्या है क्यों सुशांत को ट्यूसाइड करना पड़ी। बात बॉलीवुड में नेपोटिज्म की चलने लगी। फिर एक दिन खबर आई कि सुशांत के पिता ने सुशांत की गर्लफ्रेंड प्रधान चक्रवर्ती पर केस कर दिया वह भी पटना बिहार से। मुंबई पुलिस तो कुछ भी करने से रही। बड़ी जद्दोजहद के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। अभी सुशांत के मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई गई उससे पहले प्रधान चक्रवर्ती और उसके भाई शोविक चक्रवर्ती पर ड्रग्स का मामला साबित हो गया और उन्हें जेल हो गई। फिर बड़ी ही तेजी से ये मामला बॉलीवुड स्टास पर साबित होने लगा जिसमें सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत जैसे कई अभिनेत्रियों के नाम इस लिस्ट में शामिल हो गए। इसमें पहला सबसे बड़ा नाम आया दीपिका पादुकोण का। इस नाम ने सब को हिला कर रख दिया। धीरे-धीरे पूरा बॉलीवुड बदनाम हो गया। अभी यह सब चल रहा था कि फिर यूपी के हाथरस में मनीषा के साथ निर्भया वाला कांड हो गया। लोगों को शक था कि यह कांड यूपी के योगी सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत हुआ है। शक यकीन में तब बदल गया जब इस युग के तीन बंदर सोनिया, राहुल प्रियंका। इनमें से दो राहुल और प्रियंका मनीषा के परिवार वालों से मिलने वाले हाथ चले गए भाड़े की मीडिया के बारे में। अभी तक हाथरस वाला मामला जोरों पर था कि एक और बुरी खबर आई। राजस्थान के गेहलोत में एक पुजारी को जिंदा जला दिया गया। ये सब खबरों से एक बात तो साफ हो रही थी कि हमारे देश में कुछ लोगों ने दरिंदगी की हदें लांघ दी थीं।कोरना की शुरुआत में भी कोरोना राजकुमारियों जैसे ड्रक्टर्स, नर्सेज नहीं, सफाई कर्मचारी, पुलिस आदि से आम जनता में से कुछ लोगों ने जंग छेड़ रखी थी, इंफेक्शन के डर से। उन्हें जलील करने के साथ-साथ उन पर ईंटें तक चली गईं थीं।
इंसान को समझने का हुनर तो है नहीं कम से कम परिस्थिति को ही समझने का हुनर सीख लेते लोग। ये बॉलीवुड स्टार्स वैसे तो रील लाइफ सिर्फ बुराइयों से ही लड़ते दिखाए जाते हैं पर जब रियल लाइफ हीरो बनने का मौका आया लॉकडाउन के दौरान तब सबको सांप सूंघ गया था। कुछ ने तो राहत कोष में अपना योगदान दिया, जैसे अक्षय कुमार, महेंद्र सिंह धोनी, कई दक्षिण के फिल्म अभिनेता, रत्न टाटा और बहुत से लोग। पर ज्यादातर स्टार्स के अपने काले चेहरे सुशांत मर्डर केस आईना दिखाने लगे। ड्रग्स मामले में लोग पूरी तरह से फंसे मिले।
इसी वर्ष कोरोना पीरियड के स्टार्टिंग में एक बूढ़े साधु को पीट-पीट मार दिया गया था। इस साल सभी आम जनता इंसाफ और सुरक्षा की मांग में आक्रोशित हो गए और जगह-जगह जंग लगा रखी है। इन सभी घटनाओं ने हमें झकझोर कर रख दिया। हम यह सोचने पर मजबूर हो गए के क्या वास्तव में मानवता पूरी तरह खत्म हो गई है ज्यादातर लोगों में। केवल बाबा का ढाबा न्यूज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता है, जिसके तहत दिल्ली में एक 80 साल के बूढ़े दंपत्ति खाना तो बना रहे थे अपने ढावे पर वह भी स्वादिष्ट पर उसे खाने पर कोई ग्राहक इस लॉकडाउन के बाद जा रहा था। जिससे उन दम्पत्ति के मन में निराशा और आँखें में आंसू वाला एक वीडियो किसी प्यारे इंसान की वजह से वायरल हुआ और फिर हजारों ही मददगार लोगों का ढाबे पर तांता लग गया।अब बुढ़े दंपत्ति की आँखों में आजू की जगह होठों की मुस्कान है।ले रखा है। .फिर वैसे ही कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।जगह-जगह बच के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग भी एकत्रित हो रहे थे ये सब से यही लग रहा था कि घटिया लोगों से ज्यादा अच्छे लोग दुनिया में हैं। अगर सब एकजुट होकर अडिग रहे तो कोई मुश्किल नहीं, दुनिया से सारी गंदगी साफ होगी।सुशांत सिंह के लिए इंसाफ की मांग विदेशों में भी कई जगह तेजी से उठाए जा रहे हैं।
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