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गालियां या सामाजिक गंदगी

 समाज में जब तक लोगों की जुबान पर मां-बहन की गालियां चलती रहेंगी, तब तक औरतों ़ के हालात नहीं सुधरेंगे। दहेज प्रताड़ना, भेदभाव या रेपकांड जैसी सारी समस्याओं की जड़ ये गालियां ही तो है जो ना सिर्फ औरत को जलील करती है बल्कि उनके लिए खतरा भी पैदा करती है। जहाँ देखो वहाँ घर, बाज़ार, दुकान या कभी-कभी मंदिर के आसपास भी लोग ऐसी गालियों से परहेज़ नहीं करते। उन्हें आदत होती है बात-बात पर मां-बहन करने की और इसी में वे अपनी शान समझते हैं। आम आदमी ही नहीं, बडे-बडे नामी लोग भी मां-बहन की गालियों वाली बीमारी से अछूते नही हैं। इन गालियों का देश के बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है और कहीं न कहीं ये उनके संस्कारों में शामिल होता जाता है। मैंने कितनों को देखा है जब कोई बच्चा खासकर लड़का अगर अपने पिता और चाचा से कैच की गालियां देता है तो उनके बड़े कभी-कभी औरतें भी उसे रोकने के बजाय हंसते हैं जिससे गालियों को बढ़ावा मिल जाता है और फिर घर से शुरू हुई गालियां पूरे समाज में फैल जाती है उसी एक बच्चे के द्वारा। जब दो मर्दों की लड़ाई हो तब भी वह एक दूसरे को ऐसी गालियां देते हैं और जब कोई मर्द किसी औरत खासकर...