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मां-बाप का डर

 कहते हैं कि जहां विश्वास है वही प्यार है। फिर यह बात आजकल के पेरेंट्स और बच्चों पर क्यों लागू नहीं होती ? क्या दुनिया में पैरंट से बढ़कर बच्चों को कोई और प्यार कर सकता है। आजकल की टेक्निकल नॉलेज बच्चों में उनके पेरेंट्स से ज्यादा बढ़ गई है, ऐसे में बच्चों को यह लगता है कि वह सब जानते हैं और समझते हैं। जबकि, इंसान चाहे कितनी भी डिग्री, एजुकेशन और टेक्निकल नॉलेज हासिल कर ले, जो बातें एक्सपीरियंस से समझ आती है वह किसी और से कहां। और एक्सपीरियंस तो माता पिता से बेहतर शायद ही कोई दे पाए। अब बात ये है कि बच्चे अपने पैरंट्स पे भरोसा क्यों नहीं करते या ये कहें कि पैरंट्स को अपने बच्चों पर विश्वास करना चाहिए। जैसा कि हम जानते हैं, हम वही पाते हैं जो देते हैं, प्यार से प्यार, विश्वास से विश्वास और इज्जत के बदले इज्ज़त। गैरों से तो इन भावनाओं की उम्मीद नहीं कर सकते, कम से कम अपनों से तो की जा सकती है और बात अगर बच्चों और पेरेंट्स की हो तो डेफिनेटली।          अनुभव हमें जीना सिखाते हैं और प्यार एक दूसरे को समझना। पर उस प्यार की बुनियाद हिलती रहती है जिस पर भरोसे की नी...

तनाव मुक्त रहें

    आजकल की पीढ़ियों में patience की कितनी कमी है ये  आए दिन देखे जाते रहे हैं। लोग सफलता की चाह में सीखना भूल जाते हैं और जीतने के लिए जिद और जुनून में फर्क नहीं कर पाते हैं। नतीजा, असफलता के डर से आत्महत्या तक कर डालते हैं।      आमतौर पर आज की पीढ़ियों में दोस्तों की या यूं कहें के अच्छे दोस्तों की कमी की वजह से ऐसा होता है ये कहना गलत नहीं होगा। अब सवाल आता है के हम अच्छे दोस्त लाए कहां से? अच्छे दोस्त हमारे अपने perent बन सकते हैं या हमारे भाई बहन, जिनसे हम अपने मन की सारी बाते share कर सके।       Friendship is the best quality in any relationship.       अगर हर रिश्ते में दोस्ती हो जाए या ज्यादातर तो यकीन माने डिप्रेशन जैसी स्थिति कभी भी नहीं आयेगी। पर ऐसा होता ही नहीं है क्योंकि हर एक की मनोदशा है अपनी इच्छा दूसरे पर थोपना और यहीं से शुरुआत होती है बाहर दोस्त ढूंढने की। जो़ बिल्कुल अपने जैसा सोचता हो या support करता हो।       इसीलिए कहते हैं के दोस्त बनिए और दोस्त बनाइए अपनों को, दोस्ती कीजिए अपनों से। किसी ...